भोजपुरी सिनेमा जगत में अब तक के सबसे बड़ बजट की फ़िल्म "पटना से पाकिस्तान" अपने सफलता का परचम लहरा रही है। प्रदर्शन के दूसरे सप्ताह के आखिरी दिन भी इस फ़िल्म को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ दिखी। अनन्या क्राफ्ट एंड विजन प्रोडक्शन कृत आदिशक्ति एंटरटेनमेंट प्रा. लि. एवं त्रिमूर्ति एंटरटेनमेंट ( रजनीश सिंह ) प्रस्तुत निर्देशक संतोष मिश्रा निर्देशित फ़िल्म " पटना से पाकिस्तान" एक अनाथ लड़के की कहानी है। निर्माता अनंजय रघुराज के इस फ़िल्म को निर्देशक संतोष मिश्रा ने बहुत बारीकी से परदे पर उतारा है। फ़िल्म की कहानी शुरू होती है संग्रामपुर पंचायत से। संग्रामपुर के पंडित दीनानाथ अपनी पत्नी के साथ घर आ रहे होते है तो पीर बाबा मजार के पास उन्हें एक रोता हुआ बच्चा दिखाई पड़ता है। पंडित दीनानाथ उस बच्चे को अपने साथ ले चलने को कहते हैं। लेकिन उनकी पत्नी इसका यह कहकर विरोध करती है की पता नहीं यह बच्चा हिन्दू का है या मुसलमान का। पत्नी के विरोध करने के बाद भी पंडित दीनानाथ उस बच्चे को अपने साथ घर लाते हैं और उस बच्चे का नाम कबीर रखते हैं। फिर कहानी 25 साल आगे बढ़ जाती है। पटना के गायत्री मंदिर में पंडित दीनानाथ अपनी पत्नी और बेटी के साथ गए होते हैं जहां पर उनके गाव के कुछ और भी लोग हैं। इन सबको आतंकवादी अपने कब्जे में लेकर डराते धमकाते हैं। बिहार का प्रशासन इस मसले पर चुप्पी साधे रहता है तभी कबीर मंदिर में आकर सभी आतंकवादियों को मार गिराता है। कहानी आगे बढ़ती है और मंत्री (मनोज सिंह टाइगर) चुनाव में सहानुभूति जताने के लिए पाकिस्तान के आतंकवादी सरगना से मदद मांगते हैं। आतंकवादी अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं। जिसमे कबीर के माँ बाप और प्रेमिका (काजल राघवानी) की मौत हो जाती है। आतंकवादी के सरगना को मारने के लिए कबीर और उसके साथी पटना से पाकिस्तान जाते हैं। वहां जाकर अपने प्रतिशोध का बदला लेते हैं। कैसे कबीर को पाकिस्तान में हमसफ़र मिलती है यही है पटना से पाकिस्तान की कहानी। फ़िल्म के संवाद "अबकी जंग छिड़ी तो चेहरे का खौफ बदल देंगे...", " बम के धमाका ई ना चिन्हेला...." दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। फ़िल्म के सभी गाने कर्णप्रिय हैं जिसमे सबसे अधिक लोकप्रिय "दबे पाँव अइह" बनते जा रहा है। फ़िल्म में अंदलीप पठान का एक्शन भी बेजोड़ है। फ़िल्म का सबसे मजबूत पक्ष संतोष मिश्रा का निर्देशन और राजेश-रजनीश का मधुर संगीत है। फ़िल्म में दिनेश लाल यादव, काजल राघवानी, आम्रपाली , मनोज सिंह टाइगर, संजय पाण्डेय, प्रकाश जैस सहित सभी कलाकारों ने अपने उम्दा अभिनय का प्रदर्शन किया है। फ़िल्म में एक्शन, इमोशन, रोमांस और कॉमेडी का बेहतरीन तालमेल बैठा कर स्क्रिप्ट पर काम किया गया है। फ़िल्म के एक दो चीज को छोड़ दिया जाये तो यह फ़िल्म पूरी तरह से मनोरंजक और पैसा वसूल फ़िल्म है। यह कहना गलत नहीं होगा की निर्माता अनंजय रघुराज और निर्देशक संतोष मिश्रा ने मिलकर दर्शकों को एक साफ़ सुथरी और मनोरंजक फ़िल्म दिया है जो काबिले तारीफ है।
Courtesy - Sanket Filmidose

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